रविवार, 28 मार्च 2010

गुस्सा...!!!

बहुत गुस्सा आता है...
जब एक मालिक अपने
नौकर को डांटता है

जब एक आदमी अपनी
औरत को मारता है...

जब रिश्वत देनी पड़ती है
जब बाजार में खड़े हजारों लुटेरे
हमारी जिंदगी को लूट लेते हैं
जब कोई अमीर पैसे के बल पर
हमारी काबिलियत को लात मार देते हैं....

बहुत गुस्सा आता है...
जब लोगों के पास रहने के लिए
एक नहीं कई बंगले होते है

पर ठंढी, बरसात में कई लोग
सड़क पर बेसहाय मर रहे होते हैं...

बहुत गुस्सा आता है...
जब किसान आत्महत्या
कर रहा होता है

और देश में कुबेरपतियों की
संख्या बढ़ रही होती है

जब विश्व स्तर का विश्वविद्यालय
बनाया जाता है

पर गाँव के विद्यालय में
शिक्षक ही नहीं होता है....

बहुत गुस्सा आता है...
जब रोज़गार गारंटी योजना बनती है
पर इसकी कोई गारंटी नहीं की
योजना ठीक से भी चलती है

जब गोदामों में अनाज
खराब हो रहा होता है

वहीँ देश का भविष्य
भूख से मर रहा होता है ....

बहुत गुस्सा आता है...
जब इलाज के अभाव में
गरीब को मरना पड़ता है
सहम कर रह जाता हूँ
जब चंद पैसों के लिए
माँ को अपना बच्चा
बेचना पड़ता है
...

बस घुंटकर रह जाता हूँ
घर वाले कहते
दबकर रहो नरम बनकर रहो
यार दोस्त कहते
खामोश रहकर जियो
नहीं तो सदा के लिए
खामोश कर दिए जाओगे...

पर कब तक, कब तक युहीं सहते रहे
सहम सहम कर रोज की मौत मरते रहे ..
क्या अब इस देश में भगत, आज़ाद जैसे
अंगार नहीं रह गए ...



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