मंगलवार, 30 मार्च 2010

पेड़....!!!!

मैंने एक बाग़ लगाया है,

आम, बेल, नीम कई पेड़ हैं उसमे

बड़े अरमानो से यह बाग़ लगाया है...


बसंत में देखते ही बनता है

किसी सजी हुई दुल्हन से

कम नहीं लगते ये पेड़

देखो कैसे झूम रहे हैं...


उनकी छाहँ में बैठ कर देखो

कड़ी दुपहरिया में भी

चांदनी शीतलता का एहसास होगा

तुम्हे शायद यह सब अजीब लगे पर

मैं रोज इन पेड़ों से ब़ाते करता हूँ

अपने सुख दुःख कहता हूँ

मन को बहुत सुकून मिलता है...


इन्ही पेड़ों पर खेलकर

कईयों के बचपने बीते है

इन्ही पेड़ों के नीचे बैठकर

पथिकों के थकान मिटे हैं

इन्ही पेड़ों पर कई चिड़ियों ने

प्यारे आशियाने बनाए हैं...


पर यह सब मैं तुम्हे क्यूँ बता रहा हूँ

सुना है तुमने कुछ और तरक्की कर ली है,

सुना है तुमने एक ऐसे मशीन की इजाद की है

जो एक ही वार में पेड़ को जड़ से अलग कर देती है...

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