गुरुवार, 15 अप्रैल 2010

मरती हुई बुनियादी शिक्षा

माननीय शिक्षा मंत्री जी
चलिए मैं ले चलूँ आपको मेरे स्कूल
नाम है स्कूल का " पाठशाला की मस्ती"
पड़ता है यह जिला नामक बस्ती में
पर स्कूल की हालत है बड़ी खस्ती
शिक्षा में नहीं यहाँ कोई चुस्ती
शिक्षकों में दिखती है आम सुस्ती
मंत्रीजी स्कूल की ऐसी हालत
तो नहीं है जँचती
हमारा भविष्य भी, सरकार
मजाक में ही है रचती
हमारे साथ ये
कैसा खिलवाड़ करती?

मंत्री जी यहाँ के स्कूलों में, बच्चे
मास्टर जी को बुलाने जाते
उनकी मनुहार करते, की
गुरूजी आप स्कूल चलते
हम भी पढ़ते लिखते
हमारे भी भविष्य खिलते
हम भी दुनिया से मिलते
मुद्दों पर बाते करते
कविता किताब लिखते
औरों से कंधे से कन्धा लड़ाते
बेनिडर बाबू-साहेब से बतियाते
शायद वह भी हमसे कुछ डरते
हमें भी इंसान समझते और
हम अपने अधिकारों की
रक्षा स्वयं करते
गुरूजी काश आप पढ़ाने चलते....

मंत्री जी, बच्चे कहते
मास्टरजी...
आप ऐसे ना अंगराइए
कुछ तो हमें बतलाइये
क ख ग तो सिखलाइये
छुट्टी के बाद आराम फरमाइए
अभी तो हमें पढ़ाइये
हमारे मन की गुत्थियों को सुलझाइये
कभी तो हमसे इमला लिखवाइए
हमें भी बड़ा अफसर बनवाइए
मास्टर जी आप हमें
ऐसे ना फुस्लाइये...

मंत्री जी हम आपसे पूछना चाहते हैं
शिक्षा में इतने सारे भेद
इस बात का है बड़ा खेद
कुछ समझ नहीं आया यह खेल
हमारे स्कूल इतने टूटे फूटे
इतने छोटे क्यों हैं

स्कूल में कक्षाएँ पाँच पर
मास्टर सिर्फ एक वो भी बड़े नेक
मैं आज भी नहीं समझ पाया
की कक्षा पाँच में भी
मुझे जोड़ घटाना क्यूँ नही आया
इसका राज मुझे कोई मास्टर
आज तक क्यों नही बता पाया

मंत्री जी शायद आपको
मेरे ये प्रश्न नहीं भाये
कोई बात नहीं,
पर मंत्री जी समझ नहीं आता
क्या आपका बच्चा स्कूल में
कभी है मार खाता
फिर हमें मास्टर मारते क्यों है
हमें गरियाते क्यों हैं, हमसे
अपने हाथ पैर दबवाते क्यों हैं?

मंत्री जी हमारे कपडे साफ़ क्यों नहीं रहते
उनसे गोबर मिटटी क्यों हैं महकते
पैरों में जूते मोज़े क्यों नहीं होते
हमारे बस्ते खाली क्यों होते हैं?

मंत्री जी हमारे स्कूल में कभी
कोई बड़ा अतिथि क्यों नहीं आता
हमें कभी पिकनिक पर
क्यों नहीं ले जाया जाता
खेल कूद क्यों नहीं होता
कोई प्रतियोगिता क्यों नहीं होती
वार्षिकोत्सव क्यों नहीं मनाया जाता
हमें कंप्यूटर क्यों नहीं सिखाया जाता?

मंत्री जी हमारे स्कूल में
वाचनालय क्यूँ नहीं है
बिजली और पंखे क्यों नहीं
नल में पानी गायब क्यों है
स्कूल में शौचालय पर ताला क्यों है
मंत्री जी स्कूल खाने को क्यों दौड़ता है
शब्द उड़ते तैरते क्यों दिखाई देते हैं?

मंत्री जी एक आखिरी प्रश्न
हमें चपरासी, ड्राईवर बनने
के लिए ही क्यों पढ़ाया जाता है
हमें अँधेरे में ही जीना
क्यों सिखाया जाता है ?

आप मंद मंद मुस्कुरा रहे हैं
या खुद पर अब शर्मा रहे हैं
या अंदर ही अंदर गरमा रहे हैं
या भोली भली जनता को
फिर भरमा रहे हैं....

क्या ये आप लोगों की
सोची समझी चाल है
या फिर आप लोगों के लिए
जरूरी यह इक ढाल है
की गरीब पढ़ लिख ले
"तेरी ये मजाल है"

क्या इसीलिए आप लोग
भयंकर कूटनीति अपनाते हैं
हमें अपनों जैसा जताते हैं
हम चुप रहें इसलिए कुछ तुकडे
वजीफा के रूप में दिलाते हैं
दुपहर का भोजन कराते हैं

इसमें भी आप जनाब
हमारे ही नाम पर
अपनी ही जेबें भरते हैं
मानव होकर मानवता से
गद्दारी करते हैं
हमें शिक्षा विहीन करते हैं
कलम की ताकत को
सरेआम कुचलते हैं ॥

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