मंगलवार, 29 जून 2010

ऐ बारिश अब देर न केर.....

ऐ बारिश,तू बड़ी बेदर्द है
कड़ी परीक्षा लेती है
नयनों के नीर सुखाती है,
देख,ये सूखे वीरान खेत,
हैं तुझसे लिपटने को बेताब
ये गर्म हवाएँ भी अब तो
तुझसे ठंढक हैं चाह रहीं
ऐ बारिश अब देर न कर .....

ये नदियाँ,झरने,ये जंगल
सब हैं तुझे पुकार रहीं
कोयल,मोर और गौरैय्या
हैं सब तेरे स्वागत में खड़ी,
तेरी बाहों में झूम-झूमकर
ये हँसना खेलना चाहती हैं
अपनी जादुई बूंदों से,अब
इनकी चाहत को पंख लगा दे
नव जीवन का वर तू दे
ताकि ये फिर नए वेग से
लह-लहाकर गा सकें
गीत अब बरसात का
मेघ तेरे आने का
ऐ बारिश अब देर न कर .....

बीत गया जेठ अब अषाढ़ है आ गया
टूट गया है धैर्य किसान का
अब आम जन भी निराश है
अपना स्नेह तो अब बरसा दे
खेत बाग़ की प्यास बुझा दे
ऐ बारिश अब देर न कर .....

एक और गुजारिश भी है तुझसे
तू प्रकृति की जीवन दायिनी
तुझसे हासिल बहुत कुछ सबको,पर
जब तू घोर गर्जना करती है
अपना प्रचंड रूप दिखलाती है
दुनिया ये सहम सी जाती है
जग की पहिया रुक जाती है ....

देख उन पगडंडियों किनारे बसा
वो छोटा सा गाँव,उस सड़क किनारे
बसे वो लोग,वो मजदूर और किसान
तेरी तीखी बूंदों की मार नहीं सह पायेंगे,
जैसे-जैसे तेरा वेग बढ़ता है
वैसे-वैसे इनके आँखों से
मोती सा नीर टपकता है....

अरे,जिनके तन कपडे ही नहीं
छप्पर भी छलनी हैं जिनके
ये वो खुशकिस्मत नहीं
जो चाय की चुस्कियों के साथ
तेरा स्वागत कर सकें
ये वो हैं जो कीचड़ भरे खेत में
जोंक लगे पाँव में,धूप छाँव
कि आँख-मिचौली में
कजली गाते जाते है
जीवन का राग सुनाते हैं
इनके प्यारे मनुहार को
अब तो नज़रंदाज़ न कर
ऐ बारिश तू हौले से आना
सबकी प्यास बुझाकर जाना
ऐ बारिश अब देर न कर ...
ऐ बारिश अब देर न कर ...

3 टिप्‍पणियां:

  1. tiwari ji namaskar
    agar intajar nahi hoga to baris ki ahamiyat hi kya ? log kaise sudharenge ki baris ke liye pedo ki aawashykata hai unhe mt kato blki jyada se jyad lagao ?
    arganikbhagyoday.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  2. Acharayaji Dhanyawaad. Dixit ji main aap se bilkul sehmat hoon. humein baarish aur hammare paryavaran ke mahatva ke baare me gambheerta se sochna hoga...

    उत्तर देंहटाएं