सोमवार, 26 जुलाई 2010

बाबा का चक्कर

आज हमारी शिक्षा बढ़ रही
हमारे ज्ञान का दायरा भी बढ़ रहा
फिर हमारी सोच पर है पहरा क्यूँ लग रहा
अंधविश्वास है क्यूँ बढ़ रहा है
ढोंगी बाबाओं का जाल है क्यूँ फ़ैल रहा

शेयर मार्केट का "बुल" हो
या फूटबाल का "ऑक्टोपस"
या उड़न तश्तरी दिखने की बातें
हम कितनी आसानी से बहक जाते हैं

घर से निकलने से पहले देखते हैं राशि
कई पाप करने के बाद जाते हैं काशी
दिमाग के किसी कोने में पैठ जमाये
बैठी मान्यताएँ हमें बताती हैं की
आगे मत बढ़ो,बिल्ली ने रास्ता काट दी
बच्चे ने छींक दी,अभी रुक जाओ
आज घर से बाहर न निकलो दिशाशूल है
आह! हम कितने शिक्षित हैं

गुरु के कहने पर हम नाम लेते हैं बदल
उँगलियों में कई अंगूठियाँ लेते हैं पहन
गृह दोष पता चले तो तुडवा देते हैं घर
पर नहीं कोई परहेज छुपाने में कर

किस दिन कौन सा
रंग पहनना चाहिए
क्या भोग लगाना चाहिए
कौन से राशि वाले को
कौन सा पेड़ लगाना चाहिए
कहाँ जाना,क्या करना चाहिए
ये सब बाबा हमें बताते हैं

कब कौन सी सरकार बनेगी
कौन सी टीम जीतेगी
सगोत्रीय शादी पाप हैं
बच्ची होने में महिला का ही हाथ है
ये सब भी बाबा बखूभी हमें बताते हैं

समाचार चैनलों पर बढ़ रहे
बाबाओं की संख्या, हमारे
अंधविश्वासों को और पुख्ता कर रहे
हर चैनल के पास अपने कई बाबा हैं
सब के सब एक्सपर्ट,एक से बढ़कर एक
इन बाबाओं के पास हर मर्ज की दवा है
बस एक फ़ोन करिए और मर्ज की दवा पाइए
हमारे पास भी उनके तर्कों को मानने का
हर वैज्ञानिक तर्क मौजूद है

काश ये बाबा लोग किसी
मंगरू, भिखिया की भी तकलीफ
सुन सकते,और उन्हें दूर कर सकते
न वो गरीबी में जीते न भूखों ही मरते

हम गांववालों को गंवार कहते हैं
कहते हैं वो "अन्धविश्वासी" "अनपढ़" हैं
वो कोई गाँव नहीं था जहाँ हमने
भगवान् गणेश को दूध पिलाया था
न ही उस तट पर कोई गाँव बसा था
जहां समुन्द्र का पानी मीठा हो गया था


हम अंधे हो जाते हैं, या फिर
अँधा होने का ढोंग करते हैं
या फिर अँधा बने रहने में ही
अपनी भलाई समझते हैं
हम आज ज्यादा ही शिक्षित हो गए हैं

कुछ दिन में बाबा लोग ये भी बताएँगे की
हमें कब और कितनी सांस लेनी है
वाह बुद्धिजीव....
दूसरों पर हंसने से पहले खुद को तो देख

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सटीक बात कही है...अंधविश्वासों के बल पर ही बाबा फलफूल रहे हैं और शिक्षित लोग भी इसमें शामिल हैं ...

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  2. आपकी यह प्रस्तुति कल २८-७-२०१० बुधवार को चर्चा मंच पर है....आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा ..


    http://charchamanch.blogspot.com/

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  3. पहले के लोग बहुत अंधविश्वासी होते थे |
    पर आज के लोग तो उनसे भी ज्यादा हो गए हैं |आपने बहुत सही लिखा है | अच्छी रचना के लिए बधाई |
    आशा

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