रविवार, 1 अगस्त 2010

कुछ अनचाहे प्रश्न

कुछ अनचाहे प्रश्न जो
अक्सर मुझे झकझोरते हैं
हैरां-परेशाँ करते हैं...

इन्सान इंसानियत से दूर क्यूँ
हैवान बनकर करता बड़ी भूल क्यूँ
मंदिर-मस्जिद बने कमाई के अड्डे क्यूँ
चारों ओर लगे शराब के भट्ठे क्यूँ
ठाकरे-मोदी जैसे चेहरे हो रहे आम क्यूँ
सांप्रदायिक दंगे हो रहे दिन रात क्यूँ
गौतम-गाँधी का मिट रहा नाम क्यूँ

क्यूँ हो रही घाटी बेचैन है
दंतेवाडा के किसी घर में नहीं चैन है
फौजियों के शोषण पर नहीं
कोई लगाम क्यूँ
सरकार इसपर है चुपचाप क्यूँ

क्यूँ जज्ज को "मेलोर्ड" कहना पड़ता है
पुलिस से हमेशा डरना पड़ता है
क्यूँ कोई बिना कुछ किये ही
सालों जेल में सड़ता है
और कई बहुत कुछ करके भी
मजे से जीवन में उड़ता है

क्यूँ बाहर से अनाज आयात हो रहा
जब देश में ही अनाज है सड़ रहा
क्यूँ महंगाई है सर पर नाच रही
अमीरों को क्या फिक्र उनपर तो
थोड़ी सी भी है आंच नहीं
क्यूँ लक्ष्मी,लक्ष्मी के पास जाती हैं
गरीब को गरीबी में सताती हैं

किसान बेचता आलू
पांच रुपये किलो
हल्दीराम कमाता उसी
एक किलो से पांच सौ क्यूँ
क्यूँ किसान आत्महत्या
करने को मजबूर है
क्या उसका नहीं कोई वजूद है

आज भी बच्चा भूख से है मर रहा
तो ये कॉम्मन वेल्थ है क्यूँ हो रहा
पानी की तरह आम जन का
ये वेल्थ क्यूँ बहाया जा रहा
समझ नहीं आता ये
खेल क्यूँ कराया जा रहा

क्यूँ शिक्षा महँगी हो रही, हमें
सौगात में रिक्शा ही मिल रही
क्यूँ आमिर का बच्चा ही
डी.पि.अस,सी.ऍम.अस में पढ़ रहा
हमें क्यूँ नहीं ये हक मिल रहा

कोई माँ अपना बच्चा
बेचने पर मजबूर क्यूँ
चंद पैसों के लिए कोई
महिला शारीर बेचे है क्यूँ
ईंट-भट्ठे पर बच्चों का
जीवन होता नीलम क्यूँ
साठ साल से देश
खामोश हो, सो रहा क्यूँ

क्यूँ मंत्री के बच्चे,
बिना कुछ किये ही
मंत्री बन जाते हैं
और मेहनतकश,समाज
से जुड़ा हुआ
संत्री भी नहीं बन पाता है
कैसे एक नेता पांच साल में
करोड़-पति बन जाता है
क्या वो कभी लौटकर
जनता के बीच भी जाता है
संसद में ये सब सुनाई
देता नहीं क्यूँ

क्यूँ तस्लीमा छुप कर
जीने को मजबूर है
और जिनको छुप कर
जीना चाहिए वो सीना ताने,
अपने आप में मगरूर हैं
क्यूँ देश का पैसा स्विस बैंक
में कोई दबाये बैठा है
हवाला के जरिये करोड़ों का
बाजार फैलाए बैठा है

ऐश्वर्या ने कौन सी साड़ी पहनी
यह पहले पन्ने पर छपती है
कोई मजदूर अपने हक के लिए
महीनो से धरने पर बैठा है
यह खबर क्यूँ नहीं बनती है

घर-घर मोबाइल है पहुँच रहा हुजूर
पर महिलाएं आज भी खुले में
जाने को हैं क्यूँ मजबूर
इसका कोई उत्तर देता क्यूँ नहीं

क्यूँ किसी माँ के छाती में
दूध उतरता नहीं
क्यूँ किसी आमिर का
पेट कभी सिकुड़ता नहीं
क्यूँ कोई अपने जन्दीन पर
लाखों खर्च कर देता है
और क्यूँ लाखों को अपना
जन्मदिन भी नहीं ज्ञात होता

हमारी आबादी है एक अरब,फिर
अदब के इंसान सिर्फ मुट्ठीभर,क्यूँ
कुछ अनचाहे प्रश्न जो अक्सर मुझे
झकझोरते हैं
हैरां-परेशाँ करते हैं...

5 टिप्‍पणियां:

  1. सारे प्रश्न झकझोरते हुए .....सटीक लेखन

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  2. काफी दर्द भरे प्रश्न हैं, उत्तर हम कैसे आवारा लोगों को ही ढूँढना होगा |

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  3. ठाकरे-मोदी जैसे चेहरे हो रहे आम क्यूँ

    उतर : ठाकरे मोदी है राष्ट्र निर्माता
    यही है देश के भाग्य विधाता

    सांप्रदायिक दंगे हो रहे दिन रात क्यूँ

    उतर :
    मुंबई में कत्लेआम क्यू
    सच्चर, मिश्र है बेचैन क्यू
    हज में है मौज क्यू
    अमरनाथ में है खौफ क्यू
    राष्ट्रद्रोहियो को चैन क्यू
    अली अफजल है बेख़ौफ़ क्यू
    आम आदमी है मौन क्यू

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  4. Bibhav Kumar ji, aap kis Thakery ki baat kar rahe hain, wahi jisne pehle Dakshin Bhaartiyon ko bhagaane ki koshiss ki, phir Garib Uttar Bhartiyon ko... wahi jo hazaaron crore rupaye jama karke aam mumbaikar aur marathi manus ki baat karta hai,
    aur kya usi Modi ki baat ker rahe hain jisne insaaniyat ko koson peeche chod diya hai...
    Main toh khud aapse poochna chaahta hoon ki Mumbai, Amarnath mein khouf kyun hai...

    main sirf itna jaanta hoon ki insaaniyat ka dushman kisi kaum, kisi rashtra ka saga bhi nahi ho sakta...

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