रविवार, 5 दिसंबर 2010

हैरत की बात है

सबसे पहले उठने वाली
देर रात को सोने वाली
सब कष्टों को सहने वाली
हरदम खुश वो रहने वाली
पर हैरत की बात है ...

मंदिरों में पूजी जाने वाली
वहीं देवदासी बना दी जाती है
पुरुष प्रधान इस समाज में
वो इक वस्तु बनकर रह जाती है

नयी दिशा वो दिखलाती है
त्याग कई नित करती जाती है
पर नहीं पिता के जायदाद में
उसे एक पाई भी दी जाती है

कहने को घर की गृहस्वामिनी
पर नहीं किसी बात की आज़ादी
कागज़ की लक्ष्मी की पूँछ बड़ी
घर की लक्ष्मी अपमानित होती रही

जीवन का निर्माण करने वाली
कई बार स्वयं जनम नहीं पाती हैं
इक हज़ार के मुकाबले,वो बस
नौ सौ सत्ताईस पर सिमट जाती है

अत्याचार कई वो नित सहती
दोषी भी वही ठहराई जाती है
अपराजिता कही जाने वाली
हर आँगन में नित पराजित होती है

दहेज़ के बड़े बाजार में
लेन देन की बातें खूब चलती हैं
सुशिक्षित सभ्य संसार में
बेटियाँ और भी लाचार बनती हैं
इतनी सताई जाती की वो
मजबूरन जलकर मरती हैं

संतान न होने पर
ये दुनिया उसे बाँझ कहती है
हैरां हूँ मैं इस बात से की
किसी मर्द पर नहीं कभी
इसके लिए ऊँगली उठती है

नशे में धुत पति,घर में
पत्नी को ही क्यों मारता है
क्यों उसे सब याद रहता है
सिर्फ यही भूल जाता है

मैं आज तक नही समझ पाया
पति का कोई धर्म न निभाने वाले को भी
वो भगवान् क्यों समझती है,और
करवाचौथ का व्रत नारी ही क्यों रखती है

तितली सी वो उड़ने वाली
चिड़ियों सी वो चहकने वाली
फूलों सी वो महकने वाली
मुरझाई क्यों लगती है

प्रकृति के नियम को मनुष्य
इस तरह क्यूँ भूल बैठा है
बड़े हैरत की बात है,क्या
एक हाथ से कोई ताली बजा सकता है…

5 टिप्‍पणियां:

  1. फूलों से महकने वाली
    मुरझाई क्यूँ लगती है ...
    सचमुच हैरत की बात है ...
    सारे प्रश्न वाजिब है ..!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेहद मर्मस्पर्शी और यथार्थ चित्रण.....

    उत्तर देंहटाएं

  3. बहुत सुंदर बिल्कुल दिल को छूने वाली ...बधाई .आप भी पधारो
    http://pankajkrsah.blogspot.com
    स्वागत है

    उत्तर देंहटाएं