गुरुवार, 4 अगस्त 2011

मीठे सपने

आज मैंने खूब साईकिल चलाई
मैं रुका सा, साईकिल की पहियों संग
भागने लगा, मीठे सपनो में खोने लगा
दिन में चंदा संग बातें करने लगा

उसका साथ सफ़र सुहाना बनाता गया
की हमने ढेर सारी बातें,
ताज़ी हो आई धुंधली, भूली-बिसरी
मिश्री सी लगने वाली प्यारी प्यारी यादें

कभी चलती वो मेरा हाथ थामे
कभी उडती हवाओं संग
करती बातें तितलियों से, उसकी
मुस्कुराहट को तरसता मेरा मन

जीवन की कठिनाइयों को
आज हमने पीछे छोड़ दिया
बारिश की बूंदों संग, चाय का
वो स्वाद, मस्त हो चले थे हम

शाम होते-होते थके हम दोनों
मैं पैडल मारते मारते
वो बातें करती करती, पर
रुकना हम दोनों ने न चाहा

रात को सिरहाने आकर उसने
हौले से पूंछा, थक गए क्या
मैं हलके से मुस्काया, उससे कहना चाहा
बस साथ हो तेरा, तो तुझे
साईकिल पर दुनिया की सैर कराऊँ
जीवन के मीठे सपनों में मैं खो जाऊं

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