सोमवार, 16 जुलाई 2012

ऐन्तिल्ला (मुकेश अम्बानी के दक्षिण मुंबई में स्थित महलनुमा घर पर आधारित)


किसी का ख्वाब, किसी की जान है यह 
माया नगरी की शान है यह 
बहुत ही भव्य, भयावह और 
आलिशान है यह 

कई सपनों के टूटने पर साकार होता 
ऐसा भयावह सपना,
यह है ऐन्तिल्ला, अदभुत
ऐश्गाह है अम्बानी का अपना

कईयों की मेहनत का अपमान है यह 
पूंजीवाद की घिनौनी बेवफाई है यह 
की प्रकृति से हो रही लड़ाई है यह 
इंसान के लालच की नुमाइश है यह 

है बड़ी शान से खड़ा कईयों की
कब्र पर यह, की सारे ऐशो आराम
यहाँ मुमकिन हैं, की इंसान की घिनौनी  
ताकत की आजमाइश है यह 

ऐन्तिल्ला की जगमगाहट से 
बगलवालों की नींद उड़ गयी 
ऐन्तिल्ला की रौशनी में कहीं 
उनके घरों की रौशनी खो गयी 

पर वो भूल बैठे की, उन्होंने भी 
आस-पास के मुहल्लों की रौशनी को 
अपनी रौशनी से, कर दिया था 
गायब एक दिन 

अब नहीं चाहिए कोई शैतान 
जो करे ऐन्तिल्ला की रौशनी को गायब 
अब इंतज़ार है, फख्त 
ऐन्तिल्ला की रौशनी के अंत का 
एक सुनहरे कल का 
हम सबके हिस्से की रौशनी का 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें