बुधवार, 17 अप्रैल 2013

लतीफों को तू सच बना



तेरे इंतकाम की घड़ी करीब आ गई 
तेरे इंतेहा की शब् कल कहीं गुज़र गई 

तू बेहिचक तू बेझिझक दमन का काल बन के देख,
तू ही आजाद तू ही भगत, तू इन्कलाब तो कह के देख 

तेरे शौर्य के समां नहीं कोई प्रताप है 
तू आग है, तू बाघ है, तू जीत की मिसाल है 

इरादे तेरे नेक हैं तू चाहता बस न्याय है 
पर चाहना क्या काफी है, ख्वाब देखना नाकाफी है 

सतरंज की बिसात ये, तो चल रहे युगों से है 
तू चाल कोई चल दिखा, दे मात इनको कर दिखा 

तू कर प्रलय तू बन कहर, तू मौत को चल मौत दे 
अब जुल्म को तबाह कर, बेड़ियों को तोड़ दे 

अमीरों के मुहल्लों में तू अब कोई हाहाकार कर 
लतीफों को तू सच बना, गरीबी को कुचल दिखा 

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