बुधवार, 1 मई 2013

यहाँ इज्जत नहीं नसीब



अमीरी और गरीबी में
बस फर्क है इतना
अमीरी में ताकत है,
शान है, अम्बार है धन का

गरीबी में दफ़न है
आदमी की इज्ज़त, और 
हाथ न चले तो नसीब में
फाक न उस दिन का 


जो जोड़ता है सडकें,
उसे कारें नहीं नसीब
मेहनत को न कमाई,
न तारीफ़ है नसीब

इस मुल्क में हैं जुल्म के,
अब सौदागर कई खड़े
चल यार कहीं और चलें
यहाँ इज्जत नहीं नसीब


2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (03-05-2013) के "चमकती थी ये आँखें" (चर्चा मंच-1233) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं