शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

आदमी गुलाम है

गरीबों की बस्ती में 
आग  लगी  मस्ती में 
पसीने से लथपथ सब 
जल रहा धक्-धक् घर 
पेट देखो खाली है 
दिवाला की यहाँ दिवाली है 
यह दुनिया निराली है 

भूख है, यहाँ प्यास है 
यम का यहाँ वास है 
इलाज है अस्पताल है 
बिजली औ पानी का बुरा हाल है
शिक्षा का यहाँ अकाल है 
सब अमीरों की देन ये 
फिर भी अमीरों से आस है 


आदमी गुलाम है, आदमी बेहाल है 

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